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सरकार आवासीय भूमि अधिकार कानून लागू करे - राजगोपाल

 नई दिल्ली: 15 मार्च/ एकता परिषद के द्वारा आयोजित भूमिहीनों के जनसंसद के प्रतिनिधिमण्डल ने प्रधानमंत्री से बैठक में जनसंसद में पारित मांगों आवासीय भूमिहीनों को भूमि, राष्ट्रीय भूमि सुधार नीति को लागू करने, गरीबों की भूमि समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए विशेष कोर्ट की स्थापना और देश में हिसंक व नक्सली समस्याओं के निराकरण में स्वयं सेवी संस्थाओं की भागीदारी की मांगों से अवगत कराया।

एकता परिषद के संस्थापक और प्रख्यात गांधीवादी श्री राजगोपाल पी.व्ही. ने इण्डियन वूमेन प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री के साथ हुई चचाओं को साझा किया। उन्होने बताया कि देश में 10.5 करोड परिवार आवासीय भूमिहीन है, उनको सामाजिक न्याय, सुरक्षा और स्वाभिमान देने के लिए जरूरी है कि सरकार आवासीय भूमि अधिकार कानून लागू करे। भूमिहीन आदिवासी, दलित और गरीब किसानों की जमीन की सुरक्षा और भूमि के पुर्नआबंटन तथा भूमि उपयोगिता को निर्धारित करने के लिए राष्ट्रीय भूमि सुधार नीति को लागू करना जरूरी है। यह सब काम पिछली सरकार के साथ आगरा समझौता होने के बाद किया गया था।

राजगोपाल पी.व्ही ने कहा कि यदि जनसंसद की मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में पूरे देश भर में जनआंदोलन किया जायेगा, इसके तहत सभी जिलों में 500-500 नवजवानों को अहिसंक आंदोलन का प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया गया हैं। इसके पूरा होते ही संगठित तरीके से पूरे देश के जिला मुख्यालयों पर आंदेालन होगा। यदि इन अभियानों के बाद भी भारत सरकार आवासीय भूमि अधिकार कानून तथा भूमि सुधार नीति लागू नहीं करती तो अक्टूबर 2018 में लाखों वंचित दिल्ली में अनिश्चित कालीन आंदोलन प्रारंभ करेंगे।

ज्ञात हो कि पिछले दो दिन से जंतर मंतर पर चल रहे भूमिहीनों के जनसंसद में देश भर से आये लगभग 5000 आदिवासी, दलित, किसान व मजूदरों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। भूमि अधिकार संसद को सम्बोधित करते हुए पूर्व आदिवासी कल्याण मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि भारत में बढ़ती भूमिहीनता को देखते हुए भारत सरकार तथा राज्य सरकारों को इस दिशा में यथाशीघ्र कानून लाना चाहिए। भूमिहीनों को भूमि आबंटन करना हमारी संवैधानिक और राजनैतिक जवाबदेही है। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता श्री भक्तचरण दास ने कहा कि एक ओर सरकार बड़े उद्यमों को भूमि आबंटन करने के लिए तेजी से कार्य कर रही है किंतु आवासहीनों की समस्या की ओर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गयी, इसलिए इस आंदोलन को एक निर्णायक संघर्ष में बदलना आवश्यक है। पूर्व आदिवासी कल्याण मंत्री और झाबुआ के सांसद श्री कांतीलाल भूरिया ने कहा कि एकता परिषद को भारत सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों के समक्ष भी ऐसे आंदोलन करने चाहिए।

 
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